मंगलवार, 24 मई 2016

प्यास लगी है चलो रेत निचोड़ा जाय  ....
समुन्दर अपनी किस्मत में नहीं समाने वाला ....

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राजे मुस्कराहट की हकीकत क्या है ...
कुछ तो गम है जो छिपाए हुए हो ....

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इस कदर चरागों को न जलाओं
कि रौशनी से हवाएं पागल हो जाएँ ...

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माँ जो रूठी है उसे मना लूँगा ....
मौम को पिघलने में देर ही कितनी लगती है ....

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वो आ रहे हैं, आते ही होंगे, आयेंगे ही ...
बस इसी इन्तजार में जिंदगी गुजारी है ....

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करीब आने की कोशिश में करूँ तो लेकिन
मेरे तुम्हारे दरम्यान कोई फासला तो दिखे ..... 

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