Collection of poem
मंगलवार, 24 मई 2016
रुख में चलकर हवा के देख लिया .......
दो कदम लड़खड़ा के देख लिया .......
कुछ न निकला सिवाय आईना के... ...
हमने पर्दा उठाकर देख लिया .......
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