रविवार, 28 जून 2015

जो गम हद से ज्यादा हो खुशी नजदीक होती है
चमकेते हैं सितारे रात जब अंधेरी रात होती है ...
--------------------------------------------------
इसी रफ़तारे-आवारा से भटकेगा यहाँ कब तक
अमिरे-कारवां बन जा गुबारे -कारवां कब तक ...
-------------------------------------------------
भागती फिरती थी दुनिया जब तलब करते थे हम
जब हमे नफरत हुयी वह बेकरार आने को हैं ...
------------------------------------------------
सुलगना और जीना यह कोई जीने मे जीना है
लगा दे आग अपने दिल मे दीवाने धुआँ कब तक
-------------------------------------------------

अब मुझको करार है तो सबको करार है
दिल क्या ठहर गया कि जमाना ठहर गया ....

---------------------------------------------

लूटे मज़े उसी ने तेरे इंतजार के
जो हदे - इंतजार के आगे निकल गया ....

----------------------------------------------

जब अपने नक्श पर इंसान फतह पाता है
जो गीत गाती है फितरत किसी को क्या मालूम

---------------------------------------------

मरने के बाद आए है ए रहबर जहां
मेरे ख्याल है कि चले थे यहीं से हम

--------------------------------------------

लिखे जो कुछ और तो हमारी मजाल क्या
इतना ही लिखें के भेज दिया है तरस गए ....
---------------------------------------------

गुरुवार, 25 जून 2015

ज़मीनों आसमां से तंग है तो छोड़ दे उनको
मगर पहले नए पैदा जमीन आसमां तो कर लें ... 
सुनते हैं चमन को माली ने फूलों का कफन पहनाया है ... 
चलने को चल रहा हूँ पर इसकी खबर नहीं
मैं हूँ सफर मे या मेरी मंज़िल सफर मे हैं ... 
बेखुदी में हम तो तेरा दर समझकर झुक गए
अब खुदा मालूम वह काबा था या बुतखाना था .... 
जब तक मिले न थे जुदाई का था मलाल
अब ये मलाल है कि तमन्ना निकल गई ... 
शुक्रिया ऐ कब्र तक पहुंचाने वाले शुक्रिया
अब अकेले ही चले जाएँगे इस मंजिल से हम ..... 
मंजरे तस्वीर दर्द-दिल मिटा सकता नहीं
आईना पानी तो रखता है पीला सकता नहीं ... 
दिल है कदमों पर किसी के सर झुका हो या न हो
बंदगी तो अपनी फितरत है खुदा हो या न हो ... 
ये ऐश के बंदे सोते रहे फिर जागे भी तो क्या जागे
सूरज का उभरना याद रहा और दिन का ढलना भूल गए ... 
जिंदगी दरिया-ए- बेसाहिल है और किश्ती खराब
मैं तो घबराकर दुआ करता हूँ तूफान के लिए ... 
चारों और मेरे घोर अंधेरा
भूल न जाऊँ द्वार तेरा ... 
ऐसी भी हमने देखे हैं दुनिया मे इंकलाब 
पहले जहां जेल था वहीं आशियाँ बना ... 
कान वो कान है जिसने तेरी आवाज सुनी
आँख वो आँख है जिसने तेरा जलवा देखा ... 
कुछ अपनी करामात दिखा दे ए मौला
जो खोल दे आँख वो पीला ए साकी
होशियार को दीवाना बनाया भी तो क्या
दीवाने को होशियार बना ए साकी ........  उम्र ख़ैयाम 
सुखी बातों मे कहाँ मज़े ज़िंदगानी का
वो तो पीकर ही मिलेगा जो मज़ा जीने मे है ... 
बस इसी धुन मे रहा मर के मिलेगी जन्नत
तुझको ए बंदे न जीने का सलीका आया ... 
कौन रोता है किसी और के खातिर ए दोस्त
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया ... 
दुनिया का एतबार करें भी तो क्या करें
आँसू तो अपनी आँख का अपना हुआ नहीं ... 
कुछ हंसी, ख्वाब और कुछ आँसू
उम्र भर की यही कमाई है ... 
नज़रों ने लूटा नज़ारों ने लूटा
लहरों से बच गया था किनारों ने लूटा .... 
जो साख पर है वो झूला उतार सकता है
तेरे बगैर ये सावन भी गुजर सकता है ... 
ताकत की नुमाईश मे तलवारें बहुत आयीं
कुछ फैसला हो जाता अगर वार किया होता ... 
अच्छा हुआ जिंदगी दुलारती रही
करती अगर हमसे प्यार तो हम मर गए होते ....