जो गम हद से ज्यादा हो खुशी नजदीक होती है
चमकेते हैं सितारे रात जब अंधेरी रात होती है ...
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इसी रफ़तारे-आवारा से भटकेगा यहाँ कब तक
अमिरे-कारवां बन जा गुबारे -कारवां कब तक ...
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भागती फिरती थी दुनिया जब तलब करते थे हम
जब हमे नफरत हुयी वह बेकरार आने को हैं ...
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सुलगना और जीना यह कोई जीने मे जीना है
लगा दे आग अपने दिल मे दीवाने धुआँ कब तक
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चमकेते हैं सितारे रात जब अंधेरी रात होती है ...
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इसी रफ़तारे-आवारा से भटकेगा यहाँ कब तक
अमिरे-कारवां बन जा गुबारे -कारवां कब तक ...
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भागती फिरती थी दुनिया जब तलब करते थे हम
जब हमे नफरत हुयी वह बेकरार आने को हैं ...
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सुलगना और जीना यह कोई जीने मे जीना है
लगा दे आग अपने दिल मे दीवाने धुआँ कब तक
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