ऐसे दरकिनार हो गये ...
हाशिए के पार हो गये ...
क्या थी वो जुदाई की खबर ...
लफ्ज़ तार -तार हो गये ..
बरसों बाद ये पता चला ...
हम कहीं शिकार हो गये ...
हाशिए के पार हो गये ...
क्या थी वो जुदाई की खबर ...
लफ्ज़ तार -तार हो गये ..
बरसों बाद ये पता चला ...
हम कहीं शिकार हो गये ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें