Collection of poem
रविवार, 19 अगस्त 2012
रुख के चलकर चलकर हवा के देख लिया ...
दो कदम लडखडा कर देख लिया ....
कुछ न निकला सिवाए आईना ...
हमने परदा उठाकर देख लिया ....
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