Collection of poem
मंगलवार, 17 अप्रैल 2012
"हमारे कुछ गुनाहों की सजा भी साथ चलती है..
अब हम तन्हा नहीं, दवा भी साथ चलती है.....
अभी माँ जिन्दा है मेरी मुझे कुछ न होगा....
जब बाहर निकलता हूँ तो माँ की दुआ साथ चलती है..."
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