गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

वह रातों के अंधियारों में भटकता रहा.....
बेरहम उजाला न जाने कहाँ सोता रहा... 
सोच-सोच कर वह ला दिया बुढ़ापा.... 
बच्चपन न जाने कहाँ खेलता रहा...----आमोद 

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