शुक्रवार, 25 मई 2012

करीब इतना  रहो  कि  रिश्तों में  प्यार  रहे ..
दूर  भी इतना  रहो कि आने  का इन्तजार  रहे ...
रखो उम्मीद  रिश्तों  के दरम्यान  इतनी ...
कि  टूटे उम्मीद  मगर  रिश्ता बरक़रार रहे...

रविवार, 20 मई 2012

जो  टूट  जाओगे तो क्या उड़ान  छु  लोगे....
इरादे   सख्त हैं  तो हर चट्टान  छु  लोगे...
तुम  होसलों के परों  को तो खोलकर  देखो.
बुलंदियों  के सभी  आसमान  छु  लोगे...

शनिवार, 19 मई 2012


वो  जब  भी    मिलते   हैं  अंदाज  जुदा   होता  है....
 चाँद  सौ  बार भी  निकले   मगर  चाँद  होता  है....
वक़्त  ऐसे ही  गुजरना है  तो  गुजर क्यूँ  नहीं  जाता ..
इस  खौफ  के  दरिया  से  उतर क्यूँ  नहीं  जाता.. 
हालात   से  समझोता  हम  रोज  करते  हैं.....
एक  जख्म  नहीं  भरता   सो  जख्म करते हैं...

शुक्रवार, 18 मई 2012

हम  समझते हैं  कि  आसमान   बदलता  है...
फूल  समझता  है कि    चमन    बदलता  है...
मगर  शमशान  की  ख़ामोशी  कहती है ...
लाशें   तो  वही  हैं  बस  कफ़न   बदलता है... 

बुधवार, 16 मई 2012

मेरा दिल   तो  पूरानी  दिल्ली  ..है.....
यहाँ  से  जो भी  गुज़रा है उसी ने  मुझको लूटा है..
उठके    उसकी  महफ़िल   से   जब  चला था  मैं ...  
दूर  तक  मनाने   फिर    याद  उसकी   आयी  थी ...

मंगलवार, 15 मई 2012

कागज  की   एक   नाव  अगर  पार   हो .गयी .. 
तो   ऐसे  में  कहाँ  समंदर  की    हार हो  गयी... 

सोमवार, 14 मई 2012

घरोंदे  तुमने देखे होंगे लेकिन  घर नहीं  देखा 
हवा  देखी  होगी आंधी की मगर   तेवर  नहीं देखा...
बड़ी है  और भी चीजें जहाँ मैं तुम  ये  क्या जानो...
कुएं के मेढक  तुमने अभी सागर नहीं देखा....

गुरुवार, 10 मई 2012

खिलोने की गली से आप क्यूँ  गुजरे.....
ये  बच्चों की इच्छा है ये समझोता नहीं करती ....
शहीदों की जमीं है जिसे हिंदुस्तान  कहते है.. 
बंजर होकर  भी बुजदिलों को पैदा नहीं करती....